जनसँख्या दर - भारत के सन्दर्व में



इन दिनों U.P. सरकार की नई जनसँख्या पालिसी की चर्चा चल रही है | U . P . सरकार ने  पालिसी में छोटे परिवार के लिए रियायतों की घोषणा की है | यह एक सराहनीय कदम है एवं राज्य की जनता से भी सलाह मांगी गई है | इसमें कोई दो राय नहीं जब सरकार अपने राज्य के विकास के लिए सजग रहती है तब  इस तरह के कदम उठाना अनिवार्य है | वहीं दूसरी और बिहार के संदर्व में देखा जाय तो यहां की JDU सरकार इस संदर्व में राजनीती करने से बाज नहीं रही है | सरकार की सहयोगी दल भाजपा जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नये कानून को लाने के पक्ष में है जबकी बिहार के मुख्यमंत्री विषय से हटकर बिहार के भविष्य को अनदेखा कर रही है | JDU सरकार शराबबन्दी कानून का हवाला देकर कुछ ज्यादा ही प्रचलित होना चाहती है | अगर JDU सरकार अपने १५ वर्षों के कार्यकाल में बिहार में विकास के लिए प्रत्यनशील रहती तो क्या इतने बड़े कार्यकाल के बीत जाने के बाद भी बिहार सबसे गरीब राज्य का दर्जा क्यों प्राप्त करता | यहाँ अब भी बेरोजगारी चरम सीमा पर है | और इन सब के बीच  बिहार जनसख्या दर में भारत में सबसे ऊपर है | इस स्थिति के बाद मुख्यमंत्री को विकास पुरुष का दर्जा देना उचित कैसे हो सकता है | क्या राजद सरकार का जाना ही विकास के पैमाने को तय करेगा ?यदि है तो ये स्वर्था गलत है | इस बीच भाजपा को अपनी रणनीति  तय करनी होगी | अब राज्य के विकास के लिए नई नीतियाँ नहीं लायी गई तो राज्य कभी सशक्तीकरण की अवस्था में नहीं पायेगा | बिहार की जरूरतों को समझना सबसे जरुरी है | इस प्रयास में जनसख्या नियत्रण कानून के लिए मिलजुल कर प्रयास करना चहिये यह एक सशक्त प्रयास होगा | यह सभी जानते हैं कि बिहार में राजनीती की सीमा विकास की  धारा का हमेशा  उलंघन  कर देती है | अगर यह सूरत नहीं बदली गई तो यह तय है की चाहे कोई सरकार आये ,राज्य की स्थिति बदलने के लिए चिंतन नहीं करेगी | शहरो के लिए छोटी –मोटी योजनाओँ  का हवाला देकर विकास की नींव नहीं रखी जा सकती | इसके लिए समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखना होगा |  आज भारत विश्व में जनसँख्या के हिसाब से दूसरे स्थान पर है जो सर्वाधिक जनसँख्या दर होने के कारण कुछ वर्षों में अधिकतम जनसँख्या वाला देश बन जायेगा | इस पारीस्थिति के लिए बिहार की सरकार अपनी मनोवर्ति से मुँह नहीं मोड़ सकती | यह समझने की बात है की बात है की जनसँख्या और विकास दोनों का साथ बढ़ना एक विरोधाभास है क्योंकि अगर संसाधन सिमित है तो हम चाहें जितनी भी कोशिश करें संसाधन की कमी के कारण अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पाएंगे | और बढ़ती जनसँख्या इस मुश्किल और बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी | इसलिए राज्य सरकारें जब तक इस विषय पर ध्यान नहीं देगी ,यह स्थति भारत के लिए दुखद रहेगी | इस समस्या को समझ कर बिहार सरकार को भी जनसँख्या नियंत्रण के लिए नए कानून को लाने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे |

                                

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